Balochistan might be like Kashmir, but Pakistan is no India – Ahmar Mustikhan

Ribhu Vashishtha

Should Kashmiris thank the Ashoka Chakra, so to speak, for being nationals of India? One does not know what to do, laugh or cry on reports that Kashmiri protesters Wednesday led by separatist leader Masarat Alam Bhat had chanted “Kashmir banega Pakistan,” or Kashmir will become part of Pakistan, slogans.

India Today, released a video that showed Bhat chanting slogan, with the apt caption, “The Democracy that is India. Here Masarat Alam can chant “meri jaan Pakistan” and “Kashmir banega Pakistan fearlessly!” The reason why I felt crying was I was told by Baloch sources in my native Balochistan that Pakistan launched its first drone attack in Mekran Friday afternoon around the same time protests were being held in Srinagar. Some sections of the media also reported that Bhat had raised Pakistan flags, but others question this charge as frivolous. However, after Bhat is clearly heard saying “meri jaan Pakistan”…

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BHARATVANI -Portal for knowledge dissemination through Indian languages

Website:- http://bharatavani.in/

Android App:- https://play.google.com/store/apps/details?id=in.bharatavani.bharatavani

Bharatavani: Knowledge Through Indian Languages

Bharatavani is a project with an objective of delivering knowledge in and about all the languages in India using multimedia (i.e., text, audio, video, images) formats through a portal (website). This portal would be all inclusive, interactive, dynamic and moderated. The idea is to make India a Open Knowledge Society, in the era of Digital India.

भारतवाणी : भारतीय भाषाओं द्वारा ज्ञान

भारत में ज्ञान के निर्माण और उसको बाँटने की पुरानी परंपरा है जो मानव जाति के कल्याण के लिए है। विगत अनेक शताब्दियों के दौरान बाहरी सभ्यताओं के आगमन ने इस प्राचीन परंपरा के प्रति हमारे दृष्टिकोण को प्रभावित किया है। ‘डिजिटल भारत’ के इस युग में अपने इस ज्ञान और अपनी भाषाओं को संरक्षित करने की महती आवश्यकता है।

इस परिप्रेक्ष्य में मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा भारतवाणी परियोजना की शुरुआत की गई है जो ज्ञान के क्षेत्र में एक अनूठी पहल है। इस परियोजना का लक्ष्य एक ऑनलाइन पोर्टल के ज़रिए लगभग सभी भारतीय भाषाओं में और उनके बारे में मल्टीमीडिया प्रारूप (पाठ, श्रव्य, दृश्य, चित्रांकित रूप) में ज्ञान का ऐसा भंडार बनाना है जिसमें से मनचाही सूचना ढूँढकर निकाली जा सके।

यह भारतवाणी पोर्टल समाज के हर तबके की पहुँच के भीतर होगा। इसका क्रियान्वयन भारतीय भाषा संस्थान, मैसूरु, कर्नाटक के द्वारा किया जा रहा है। इस पोर्टल पर कॉपीराइट (संसोधित) कानून, 2012 की ‘उचित प्रयोग’ से संबंधित धाराओं के अंतर्गत शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए मुक्त ज्ञान सामग्री उपलब्ध करायी जा रही है।

एक सबल, अंतःक्रियात्मक और उपयोग में आसान वेब उपकरण के जरिए देश भर के विभिन्न सरकारी/निजी संस्थानों द्वारा तैयार ज्ञान सामग्री को इकट्ठा करके उसे सार्वजनिक उपयोग के लिए उपलब्ध कराना भारतवाणी परियोजना का प्रमुख कार्यक्षेत्र है। इस परियोजना का मार्गदर्शन एक राष्ट्रीय सलाहकार समिति और एक तकनीकी सलाहकार समिति करेगी और इनके अतिरिक्त प्रत्येक भाषा के लिए अलग-अलग संपादकीय समितियाँ भी होंगी। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ज्ञान के क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं और व्यक्तियों से इस महत्वाकांक्षी परियोजना में सक्रिय सहभागिता की अपील करता है जो ज्ञान के आदान-प्रदान के एक बड़े सामाजिक आंदोलन में परिणत हो पाएगा।

भारतवाणी परियोजना के अंतर्गत निम्नलिखित प्रमुख क्षेत्रों में सामग्री का प्रकाशन किया जाएगा-

  1. पाठ्य पुस्तक कोश: भाषानुसार विभिन्न विषयों के पाठ्य पुस्तकों का संचय
  2. ज्ञान कोश : विभिन्न भाषाओं से संबंधित विश्वकोशों का संचय (डिजिटलीकरण की प्रक्रिया जारी)
  3. शब्द कोश : विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित एकभाषी, द्विभाषी एवं बहुभाषी कोशों का संचय
  4. भाषा कोश : भाषा अधिगम या उससे संबंधित पुस्तकों का संचय
  5. सूचना प्रौद्योगिकी कोश : टीडीआइएल द्वारा विकसित विभिन्न भाषाओं से संबंधित सॉफ्टवेर के लिंक
  6. बहुमाध्यम कोश : विभिन्न भाषाओं से संबंधित श्रव्य एवं दृश्य सामग्री का संचय

आइए! अपनी भाषाओं में हम ज्ञान की खोज करें। सभी डिजिटल मंचों पर अपनी भाषा का विस्तृत उपयोग करें और संपूर्ण विश्व को अपनी समृद्ध विरासत का अनुभव कराएँ।

Bharatavani: Knowledge through Indian languages

India has a hoary tradition of creating and sharing knowledge for the welfare of the mankind. The advent of civilisation over the past several centuries impacted the way we looked at this ancient tradition. There is an urgent need to preserve the knowledge and our languages in the era of Digital India.

In this context, the Bharatavani Project (BvP), a knowledge initiative is launched by the Ministry of Human Resource Development (MHRD), Government of India. This Project aims to build a searchable knowledge repository in and about all the languages in India in multimedia (text, audio, video, images) formats through an online portal. The Bharatavani Portal will be accessible to all sections of society. The Project is being implemented by the Central Institute of Indian Languages, Mysuru, Karnataka. The Portal offers open knowledge under fair usage clauses of The Copyright (Amendment) Act, 2012, for educational purposes.

Providing available knowledge already created by the Government and publicly funded institutions all over India, and putting it across for the public usage, by deploying robust, interactive, user friendly web tools will be the main thrust of the Bharatavani Project. The Project will be guided by a National Advisory Committee and a Technology Advisory Committee, besides Language Editorial Committees in each of the languages. The MHRD seeks active participation of the knowledge organisations, individuals in this ambitious project resulting in a massive social movement of knowledge sharing.

The Bharatavani Portal would publish the content in the following main sections:

1. PaaThyapustaka Kosha: Textbooks
2. Jnana Kosha : Knowledge base (Digitisation underway)
3. Shabda Kosha: Dictionaries
4. Bhasha Kosha : Language learning
5. Suchanaa Praudyogikii Kosha : IT tools (Linked to TDIL)
6. Bahumaadhyama Kosha: Multimedia

Come and explore the knowledge in our languages. Let us use our languages extensively in all digital platforms and make the presence of our rich heritage felt all over the world.

भारतवाणी के बारे में

भारतवाणी परियोजना से संबंधित जनसूचना

भारतवाणी क्या है? इस परियोजना का मंतव्य क्या है?

  • भारतवाणी एक परियोजना है, जिसका उद्देश्य मल्टीमीडिया (पाठ, श्रव्य, दृश्य एवं छवि) का उपयोग करते हुए भारत की समस्त भाषाओं के बारे में एवं भारतीय भाषाओं में उपलब्ध ज्ञान को एक पोर्टल (वेबसाइट) पर उपलब्ध कराना है। यह पोर्टल समावेशी, संवादात्मक और गतिशील होगा। इसका मूल उद्देश्य है डिजिटल भारत के इस युग में भारत को “मुक्त ज्ञान” समाज बनाना।

भारतवाणी ज्ञान पोर्टल के लाभार्थी कौन होंगे?

  • भारतवाणी का उपयोग विभिन्न सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक (औपचारिक एवं अनौपचारिक) पृष्ठभूमि तथा सभी आयु वर्ग के लोग कर सकते हैं।

भारतवाणी के लिए सामग्री का संकलन कैसे किया जायेगा?

  • भारतवाणी भारत के समस्त सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थाओं, शैक्षणिक संस्थानों, शैक्षणिक बोर्ड, पाठ्य-पुस्तकों से संबंधित निदेशालयों, विश्वविद्यालयों, आकादमी एवं प्रकाशन गृहों आदि से ज्ञान सामग्री का संकलन मल्टीमीडिया के रूप में समस्त सूचीबद्ध भाषाओं में करेगी।
  • भारतवाणी व्यक्तिगत संस्थाओं से भी आग्रह करेगी कि अनवरत ऑनलाइन उपयोग के लिए वे अपने सामग्री को साझा करें।
  • सामग्री संकलन और प्राथमिकता निर्धारण को अनुमोदनार्थ प्रस्तुत किया जाएगा। संपादकीय समिति द्वारा प्रस्तुत सिफारिशों पर सलाहकार समिति द्वारा अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
  • भारतवाणी का ध्येय ज्ञान सामग्री प्रकाशित करना है। साथ ही सलाहकार समिति द्वारा विशिष्ट मापदंडों के आधार पर निर्धारित कथेतर साहित्य को भी प्रकाशित करेगी।

भारतवाणीसामग्री की गुणवत्ता कैसे सुनिश्चित करेगी?

  • भारतवाणी सामग्री प्रकाशन की शुरुआत विषय विशेषज्ञों द्वारा निर्मित सामग्री तथा प्रतिष्ठित संस्थानों द्वारा प्रकाशित सामग्री से करेगी। इस क्रम में सर्वप्रथम भारतीय भाषा संस्थान द्वारा प्रकाशित सामग्रियों को लिया जाएगा।
  • नव सृजित सामग्री के प्रकाशन के संदर्भ में भारतवाणी द्वारा प्रत्येक भाषा के लिए सृजित संपादकीय समिति द्वारा निर्णय लिया जाएगा।
  • त्रुटि रहित सामग्री के प्रकाशन हेतु एक व्यवस्थित तंत्र स्थापित किया जाएगा।

क्या भारतवाणी भाषा से संबंधित सूचना प्रौद्योगिकी उपकरणों को सार्वजनिक करेगी?

  • भारतवाणी, भारतीय भाषाओं के लिए उपलब्ध एवं अद्यतित आईटी उपकरणों को प्रदर्शित करने के लिए एक मंच प्रदान करेगी जो संचार मंत्रालय और सूचना प्रौद्योगिकी (एमसीआईटी)के साथ समन्वय स्थापित करेगी, जो अपनी विभिन्न एजेंसियों यथा- टीडीआईएल आदि के माध्यम से ऐसे उपकरणों के विकास में संलग्न हैं। भाषा से संबंधित विभिन्न उपकरणों यथा- फॉन्ट, सॉफ्टवेयर, टंकण उपकरण, मोबाइल एप्स, बहुभाषी अनुवाद उपकरण, पाठ से वाक् एवं वाक् से पाठ आदि उपलब्ध कराए जाएँगे।

बृहद पैमाने पर समाज के लिए भारतवाणी के क्या लाभ हैं?

  • भारतवाणी, भारतीय भाषाओं/मातृभाषाओं को बृहद पैमाने पर उपलब्ध कराएगी, जिसके परिणाम स्वरूप युवा पीढ़ी अपनी सभी ऑनलाइन गतिविधियों यथा- ब्लागिंग, सामाजिक मीडिया और अध्ययन आदि के लिए मातृभाषा का प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित होगी।
  • भारतवाणी, लुप्तप्राय भाषाओं, अल्पसंख्यक भाषाओं एवं जनजातीय भाषाओं/मातृभाषाओं को साइबर स्पेस में महत्वपूर्ण स्थान दिलाएगी।
  • भारतवाणी, भारत की लगभग सभी भाषाओं/मातृभाषाओं के साथ-साथ भारत के सभी समुदायों के साथ संपर्क स्थापित करने, दूर-दराज़ के क्षेत्रों तक पहुँचने और सांस्कृतिक जागरूकता और समझ को बढ़ावा देने का कार्य करेगी।

क्या भारतवाणी सरकारी सूचनाओं को प्रकाशित करेगी?

  • भारतवाणी परियोजना का, कृषि, व्यापार, शिक्षा, सामाजिक क्षेत्र, समय पर सेवाएँ प्रदान करने वाले एवं अन्य महत्वपूर्ण/आवश्यक पोर्टल से संबंध होगा, जिससे सभी नागरिकों को एक ही पोर्टल पर ज्ञान और सूचना की प्राप्ति होगी।

भारतवाणी में किन भाषाओं को सम्मिलित किया गया है?

  • प्रथम वर्ष में, 22 अनुसूचित भाषाओं अर्थात असमिया, बंगाली, बोडो, डोगरी, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, मलयालम, मणिपुरी, मैथिली, मराठी, नेपाली, उड़िया, पंजाबी, संताली, संस्कृत, तमिल, तेलुगु और उर्दू को सम्मिलित किया जाएगा। तदोपरांत अन्य भाषाओं को चरणबद्ध रूप से शामिल किया जाएगा।

भारतवाणी का ठोस लक्ष्य क्या है? भारतवाणीमें प्रकाशित सामग्री किस प्रकार की होगी?

  • भारतवाणी अपने परिचालन के पहले और दूसरे वर्ष में प्राथमिकता के आधार पर निर्धारित विषय से संबंधित ज्ञान सामग्री का सृजन करेगी। तदोपरांत अगले पाँच वर्षों के लिए प्रत्येक भाषा/मातृभाषा से संबंधित विशिष्ट सामग्री के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। प्रारंभ में विभिन्न भाषाओं में सहजता से उपलब्ध सामग्रियों को प्रकाशित करने का प्रयास किया जाएगा।
  • भारतवाणी निम्नांकित कार्यों का निर्वहन करेगी
  1. भाषा और साहित्य का प्रलेखन डिजिटल और इलेक्ट्रानिक स्वरूप में तैयार करना
  2. लिपि और उसका नामांकन तथा टाइपोग्राफी कोड तैयार करना
  3. शब्दकोशों और शब्दावलियों का निर्माण करना
  4. मौखिक एवं लिखित साहित्य तथा ज्ञान ग्रंथों का आधुनिक और शास्त्रीय भाषाओं में अनुवाद करना
  5. ऑनलाइन भाषा शिक्षण, अधिगम एवं भाषा शिक्षक हेतु प्रशिक्षण प्रदान करना, प्रमाणपत्र देगा तथा सतत, व्यापक मूल्यांकन सहित ऑनलाइन भाषा परीक्षण और मूल्यांकन पर ध्यान देगा।

क्या भारतवाणी में प्रकाशित सामग्री का निःशुल्क उपयोग किया जा सकता है? भारतवाणी में सामग्री का कॉपीराइट कैसे सुरक्षित किया जाएगा?

  • भारतवाणी, आम नागरिक, विशेष रूप से भारतीय नागरिकों के साथ ज्ञान साझा करने के उद्देश्य से निर्मित आधुनिक युग का एक पोर्टल है, अतः भारतवाणी पोर्टल पर उपलब्ध समस्त सामग्री को शैक्षणिक और अनुसंधान प्रयोजनों के लिए निःशुल्क उपयोग में लाया जा सकता है।
  • पोर्टल, भारतीय कॉपीराइट अधिनियम 1957 के अनुसार केवल ऐसी गतिविधियों की अनुमति देता है जो धारा 52 के तहत कॉपीराइट उल्लंघन के अंतर्गत नहीं आते हैं।

क्या निजी संस्थानों और व्यक्तियों द्वारा भारतवाणी के लिए योगदान किया जा सकता है? क्या भारतवाणी द्वारा सामग्री के लिए मानदेय का भुगतान किया जायेगा?

  • हाँ। मौलिक कथेतर साहित्य/ज्ञान सामग्री के निःशुल्क सार्वजनिक उपयोग के लिए योगदान किया जा सकता है। लेखकों के योगदान के लिए उन्हें श्रेय दिया जाएगा। इस प्रकार की सामग्री की स्वीकृति संपादकीय समिति के अनुमोदनाधीन होगी।
  • भारतवाणी मातृभाषा में सामग्री प्रस्तुत करने के लिए ऑनलाइन उपकरण उपलब्ध करायेगी।
  • सामग्री के सतत उपयोग के लिए मानदेय के दरों का निर्धारण सलाहकार समिति द्वारा किया जाएगा, जो मौलिक सामग्री के लिए निर्धारित वित्त, सामग्री की मौलिकता और उसकी विशिष्टता पर निर्भर करेगा।

शारीरिक रूप से अक्षम लोगों के लिए भारतवाणी कैसे सुलभ होगी?

  • भारतवाणी, पोर्टल विकसित करने में भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत मापदंड़ों का भी अनुपालन करेगी।
  • भारतवाणी, निःशुल्क रूप में पाठ से वाक् की सुविधा को उपलब्ध भाषाओं में प्रदान कराएगी ताकि नेत्रहीन लोगों द्वारा भी वेबसाइट सामग्री का उपयोग किया जा सके।

यदि कोई भारतवाणी पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी/सूचना का दुरुपयोग कर रहा है, तो क्या होगा?

  • भारतवाणी साधारणतः नागरिकों पर विश्वास करती है। इस पर उपलब्ध सामग्री की यदि कोई नकल करता है या सामग्री का दुरुपयोग करता है तो उसे तुरंत हमारे ध्यान में लाया जा सकता है। भारतवाणी, भाषाओं को सीखने और प्रसारित करने के लिए, जो भारतीय समाज की समृद्ध विरासत के संरक्षण में सहयोगी होगा, प्रोत्साहित करती है।

भारतवाणी की प्रशासनिक संरचना क्या है?

  • भारतवाणी का परिचालन :
  1. प्रख्यात भाषावैज्ञानिकों एवं विषय विशेषज्ञों की एक राष्ट्रीय सलाहकार समिति के द्वारा होता है।
  2. पोर्टल और भाषा उपकरणों के तकनीकी पहलुओं पर मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए प्रौद्योगिकी सलाहकार समिति का गठन किया गया है।
  3. भारतवाणी हेतु सामग्री संकलन के लिए भाषावार संपादकीय समितियों का गठन किया गया है।

भारतवाणीका परिचालन कहाँ से होता है?

  • भारतवाणी का परिचालन भारतीय भाषा संस्थान, मैसूर (कर्नाटक) के परिसर से होता है।

पत्रव्यवहार का पता

भारतवाणी परियोजना

भारतीय भाषा संस्थान

मानसगंगोत्री, हुणसूर मार्ग, मैसूरू –570006

दूरवाणी:+91-821-2515820 (निदेशक)

स्वागत-कक्ष/PABX : +91-821-2345000

फ़ैक्स:+91-821-2515032 (कार्यालय)

परियोजना का ई-मेल:info@bharatavani.in

 

GST and the Indian nation-state

Surendranath Banerjee’s newspaper the Bengalee made the point on 18th January, 1902:

“The agitation for political rights may bind the various nationalities of India together for a time. The community of interests may cease when these rights are achieved. But the commercial union of the various Indian nationalities, once established, will never cease to exist. Commercial and industrial activity is, therefore, a mighty factor in the formation of a great Indian union.”